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राजनीति, बुद्धि और धूर्तता Politics, Intelligence and Con ~ Shubhanshu

कुछ बातें आधारभूत रूप से असंभव हैं। जैसे राजनीति में अच्छे और बुद्धिमान व्यक्ति का टिक पाना। लगभग 4% लोग ही बुद्धिमान, अच्छे व राजनीति से दूर होते हैं और बाकी के लोग अपने जैसा नेता चुनते हैं। 😂 असल में, कम बुद्धिमान लोगों को ही दूसरों की ज्यादा ज़रूरत पड़ती है। इसीलिए राजनीति का जन्म हुआ। बुद्धिमान लोग हमेशा कम मेहनत वाले अपने कामो में लगे रहे और कम बुद्धि वाले लोग किसी न किसी धूर्त की सेवा करने में लगे रहे। आपको तो पता ही होगा कि दुनिया में जो व्यक्ति अपना नुकसान कर ले, उसे ही लोग अच्छा समझते हैं। लेकिन साथ ही उसे मूर्ख भी बोल कर उसका शोषण भी शुरू कर देते हैं। इसीलिए जो मूर्ख नहीं होता, धूर्त होता है, वही नेता बन पाता है और फिर अच्छे (मूर्ख) लोगों का शोषण शुरू कर देता है। 😂 राजनीति बुरी नहीं है, अगर इसे कम्प्यूटर चलाये। समस्या इंसान की धूर्तता, शासन करने की हवस, लालच, नफ़रत, और घमंड है। जो कभी खत्म नहीं हो सकता। इंसान का अस्तित्व ही इस बुराई के साथ है। इसीलिए अपनी अलग दुनिया बसाओ, आम जनजीवन से जितना दूर रह सकते हो, रहो। जीवन मे कुछ अच्छा और मनोरंजक करो। लोगों तक अपनी बात पहुँचा सकते हो...

राजनीति, बुद्धि और धूर्तता Politics, Intelligence and Con ~ Shubhanshu

कुछ बातें आधारभूत रूप से असंभव हैं। जैसे राजनीति में अच्छे और बुद्धिमान व्यक्ति का टिक पाना। लगभग 4% लोग ही बुद्धिमान, अच्छे व राजनीति से दूर होते हैं और बाकी के लोग अपने जैसा नेता चुनते हैं। 😂 असल में, कम बुद्धिमान लोगों को ही दूसरों की ज्यादा ज़रूरत पड़ती है। इसीलिए राजनीति का जन्म हुआ। बुद्धिमान लोग हमेशा कम मेहनत वाले अपने कामो में लगे रहे और कम बुद्धि वाले लोग किसी न किसी धूर्त की सेवा करने में लगे रहे। आपको तो पता ही होगा कि दुनिया में जो व्यक्ति अपना नुकसान कर ले, उसे ही लोग अच्छा समझते हैं। लेकिन साथ ही उसे मूर्ख भी बोल कर उसका शोषण भी शुरू कर देते हैं। इसीलिए जो मूर्ख नहीं होता, धूर्त होता है, वही नेता बन पाता है और फिर अच्छे (मूर्ख) लोगों का शोषण शुरू कर देता है। 😂 राजनीति बुरी नहीं है, अगर इसे कम्प्यूटर चलाये। समस्या इंसान की धूर्तता, शासन करने की हवस, लालच, नफ़रत, और घमंड है। जो कभी खत्म नहीं हो सकता। इंसान का अस्तित्व ही इस बुराई के साथ है। इसीलिए अपनी अलग दुनिया बसाओ, आम जनजीवन से जितना दूर रह सकते हो, रहो। जीवन मे कुछ अच्छा और मनोरंजक करो। लोगों तक अपनी बात पहुँचा सकते हो...

About Shubhanshu Singh Chauhan Vegan

Shubhanshu Singh Chauhan is a vegan , anti-natalist , feminist , nudist , polyamorous , nonconformist , minimalist , introvert , religion-free atheist , and rationalist human . He is a strong advocate for animal rights , environmentalism , and social justice . He is also a vocal critic of religion and traditional values. Shubhanshu Chauhan was born in India in 1984 in Bareilly, Utter Pradesh . He grew up in a middle-class family and attended a public school. He was always a curious and independent thinker. He started questioning the status quo at a young age. In his early twenties, Chauhan became interested in veganism and animal rights . He learned about the cruelty of the meat and dairy industries and decided to go vegan. He also became interested in environmentalism and started learning about the impact of human activity on the planet. In his late twenties, Chauhan became interested in feminism and social justice. He learned about the history of oppression and discrimination ...

Capital Money is your Earning Source ~ Shubhanshu

रुपये से रुपये कमाने का सबसे आसान और सुरक्षित तरीका है उसको ब्याज के लिये इन्वेस्ट करना। जैसे फिक्स डिपॉजिट या P2P इन्वेस्टमेंट। लेकिन इससे पर्याप्त आय लेने के लिये आपको बहुत अधिक मात्रा में धन चाहिए होता है। जैसे, यदि बैंक 7% ब्याज दे रहा है और आप अपनी मासिक आय 50000₹ प्रति माह करना चाहते हैं तो आपको कुल 1 करोड़ रुपये की FD खोलनी पड़ेगी। इसपे 10% TDS भी देना होगा। तो आपको 50000₹ मासिक आय मिलेगी। ऐसे लोग जिन्होंने पैसे इन्वेस्ट न किये हों, FD से कमाई का पता न हो, उनको ये रकम ज़रूरत से ज्यादा ही लगेगी। क्योकि परंपरागत समाज मूल धन ही खा लेता है और गरीब बना रहता है जबकि मूलधन ही आपकी कमाई का साधन है। उसी से ब्याज आता है। उसे कम नहीं करना है। मैं चूंकि निजी कम्पनी से ब्याज ले रहा हूँ तो मुझे 7% की जगह 12% का ब्याज मिल रहा है। अतः मुझे इतनी आय हेतु सिर्फ 50-60 लाख रुपये की आवश्यकता है। लेकिन निजी कम्पनी किसी दिन बन्द हो गई और उसने मेरा पैसा वापस कर दिया तो मैं क्या करूँगा? तब मुझे वापस बैंक में 6-7% वाली FD से ही संतोष करना पड़ेगा। मेरी मासिक आय तुरन्त 50000₹ से घट कर, 20000₹ रह जायेगी। जिसमें ...

Feminism: समता और न्याय की बात ~ Shubhanshu

यदि आप पुरुष हैं तो महिलाओं के बारे में ज्ञान देना बन्द करें। आप महिलाओं के बारे में महिलाओं से अधिक नहीं जानते हैं। जैसे आप महिलाओं को ब्रा, पैंटी, माहवारी, बच्चा पालने, कैसे रहना है, कैसे जीना है, किचन आदि का ज्ञान न दें। इसी तरह यदि आप महिला हैं तो पुरुषों के बारे में ज्ञान देना बन्द करें। आप पुरुषों के बारे में उनसे अधिक नहीं जानती हैं। जैसे आप मर्द सुधर नहीं सकता है, वो तो बना ही शोषण के लिये है, वो तो होता ही ऐसा है आदि नकारात्मक बातें न करें। ये फेमिनिस्म के सभी सिद्धांतो के खिलाफ बात है। मर्द सुधरेगा, इसीलिये हम फेमिनिस्म को मानते हैं। अन्यथा बन्दूक पकड़ा दी जाती हर महिला को। महिला, महिलाओं के बारे में ज्ञान दे और पुरुष, पुरुषों के बारे में ज्ञान दे। तो ही नैतिक लगेगा। ये तो हुई बात लैंगिक समानता की। अब बात करते हैं पितृसत्ता की। हमारी लड़ाई पितृसत्ता से है। मर्दों से नहीं।  मर्द 90% पितृसत्तू हैं इसीलिये मर्दों का नाम अक्सर लिया जाता है। लेकिन इसका अर्थ ये नहीं कि मर्द सुधर नहीं सकता है। मैं सुधरा हूँ। कई और फेमिनिस्ट मर्द सुधरे हैं। किसी लिंग के बारे में धारणा बनाना ही अन्याय ह...

शरीर सुंदर असुंदर नहीं होते। हमारी सोच होती है। ~ Shubhanshu

एक बात समझने वाली है। हम सब की व्यक्तिगत पसन्द भिन्न हो सकती है और एक सी भी। लेकिन आपको कोई मानक सेट करने की आवश्यकता नहीं। ये अपराध है। इसीलिए न तो अपने हिसाब की सुंदरता का प्रचार करें और न ही असुन्दरता का। जो व्यक्ति वैसा नहीं, वह भी किसी और की पसन्द हो सकता है लेकिन अगर आप ऐसे मानक स्थापित करेंगे कि फलाँ आकार-प्रकार, रंग-रूप का व्यक्ति ही श्रेष्ठतम है तो आप, जो वैसा नहीं, उसके अस्तित्व को ही अपमानित कर रहे हैं। इससे लोग आत्महत्या कर रहे हैं। मैं भी पहले सुंदर लगने वाली लड़कियों की फ़ोटो शेयर करता रहता था। तब मुझे एक लड़की ने जमकर डाँट लगाई। उसने कहा कि आप जो ऐसे नहीं, उनको अपमानित कर रहे हैं। अपनी पंसद को सीमित लोगों में बता सकते हैं। लेकिन इस तरह से सबके बीच नहीं। सबके बीच बोलने से मानक सेट हो जाते हैं जो कि आवश्यक नहीं और घातक हैं। तब से मैं वर्तमान मानक को तोड़ने हेतु कुछ विपरीत पोस्ट अवश्य कर रहा हूँ लेकिन कोई मानक सेट करने हेतु नहीं। न ही आपको करने की आवश्यकता है। मैं आपसे आपको किसी गन्दी लगने वाली शक्ल या शरीर की तारीफ करने को नहीं बोल रहा। झूठ बोलने की आवश्यकता भी नहीं। लेकिन जहा...

Whenever people will know the truth, theists will be regrat.

आस्तिक: ईश्वर से डरो, नहीं तो वह तुमको मार डालेगा। शुभ: और अगर डरें तो क्या अमर हो जाएंगे? आस्तिक: ईश्वर है, तुम एक दिन मानोगे। शुभ: कब? आस्तिक: जब तुम मरोगे। शुभ: 😁 इंसान मरने से ही तो डरता है। मर ही गए तो क्या पाप और क्या पुण्य? और तुमको कैसे पता कि मरने के बाद क्या होगा? तुम मर गए क्या? 😂🤣 आस्तिक: कई लोग जो कुछ समय के लिए मर गए थे उन्होंने बताया। शुभ: क्या वो आस्तिक थे? आस्तिक: हाँ। शुभ: तो वो जो कह रहे उसका क्या भरोसा? और ये बताओ ये मरने का नाटक करने वालों का सिर क्या धड़ से अलग हो गया था और वो जीवित हुए? आस्तिक: नहीं। शुभ: नहीं न? दिल की धड़कनें रुकने का अर्थ मृत्यु नहीं है। मस्तिष्क की मृत्यु का अर्थ मृत्यु है। जिसे डॉक्टर ब्रेन डेथ बोलते हैं। जब तक ब्रेन डेड नहीं होता, कोई भी वापस जिंदा हो सकता है। एपिनेफरीन नाम का एक कृत्रिम एड्रीनलीन हॉरमोन है। उसे दिल की धड़कन रुके हुए इंसान में लगाने से दिल वापस चालू हो जाता है और एलक्ट्रिक शॉक देने पर भी। होठों से होंठ लगा कर सांस देने से और छाती को एक लय में दबाने से भी। (सीपीआर) तो क्या इसे मृत्यु बोलोगे? जब दिमाग ऑक्सीजन की कमी से अस्थाय...

About the size of sexual organs.

लोग चिकनी योनि को ढीला समझ लेते हैं और सूखी को टाइट। इससे ही वहम बना कि बड़ा है तो बेहतर है। जबकि बड़ा है तो और समस्या है, सूखी योनि के साथ। जिसे अनुभव होता है उसकी योनि कामसुख की आशा में जल्दी चिकनी हो जाती है और जिसे अनुभव नहीं उसकी सूखी रहती है। इसीलिए कसी/छोटी होने का वहम होता है। जबकि छोटी योनि सिर्फ अवयस्क बच्ची की ही होती है जिसमें बड़ा शिश्न घुसने से वह फट सकती है और रक्त बहने से मृत्यु भी हो जाती है। भारत में पहले 9 साल की उम्र में माहवारी आते ही बड़ी उम्र के पुरुष सम्भोग करते थे बच्चियों से और जब एक-एक करके योनि फटने से मौत होने लगी उनकी, तो कानून बनाया गया कि 13 साल से कम की लड़की से सेक्स नहीं किया जाएगा। लेकिन उसमें भी मौत हो गई, तो यह आयु बढ़ कर 15 हुई। यह बाद में 16 हुई लेकिन इसे पुनः बदल कर 18 कर दिया गया। आज भी इसीलिए यदि चुपके से विवाह हो गया है तो 15 साल की लड़की के साथ सम्भोग कानूनन मान्य है। जबकि बता कर करना है तो यह आयु 18 और 21 होनी चाहिए। यह कानून भी भ्रमित करते हैं। क्योंकि अवयस्क के बाल विवाह को चुपके से करने की मान्यता दे रहा है, यह कानून। मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड भी...

Is having a baby free life is negative and harmful?

Antinatalism (प्रतिसंततिवाद) को अगर आप जन्म को नकारात्मक दृष्टि से देखना है सोच कर अच्छा नहीं महसूस करते तो इसे आप संतति/शिशु मुक्त कह सकते हैं। नकारात्मक उसी बात को कहा जाता है जिसमें नकारात्मक शब्द हों लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि किसी भी बात को नकारना गलत है। बलात्कार को नकारना सही है। नशे को नकारना सही है। ऐसे ही हर गलत कार्य को नकारना सही है। सही बात को स्वीकार करना सकारात्मक है और गलत बात को नकारना भी अच्छा है। वंश/संतति बढ़ाना गलत है क्योंकि आप जिसकी मृत्यु तय है और जीवन संघर्षों से भरा है, यह जानते हुए भी उसे इस घटिया दुनिया में बिना उसकी मर्जी जाने लाते हैं। जब मानव को ज्ञान नहीं था तब यह प्रकृति अपने आप अधिकतम संतानों को नष्ट कर देती थी। अब जब आपने प्रकृति के प्रकोप को वश में कर लिया है और विवाह जैसी संस्था बना कर जनसंख्या बढाने के उद्देश्यों से ही पोलिगेमस मानव को मोनोगेमस बनाने का प्रयास किया है तो यह बहुत बड़ा अपराध है क्योंकि उस बच्चे के अच्छे बुरे हर तरह के भविष्य के ज़िम्मेदार आप होंगे। पहले प्रकृति होती। अगर एडोल्फ हिटलर की माँ बच्चा न जनती, अगर ओसामा बिन लादेन और आसिफ जरदा...

Loyalty: What is it and what is commitment in relationship?

वफादारी, क्या है ये? दरअसल यह किसी वचन, वादे, कसम, बीड़ा उठाने और उस पर बने रहने को कहा जाता है। कमिटमेंट (प्रतिबद्धता) अक्सर मानव जोड़े केवल आपस में ही सेक्स करेंगे कह कर वादा करने को कहते हैं। जिसे विवाह शब्द से संक्षेप में शर्म के कारण कहा जाता है। सोचिये सेक्स करने में शर्म नहीं, उसके बारे में बताने में शर्म है। वादा क्यों किया? यह सवाल ही जवाब है कि मानव को एकदूसरे पर भरोसा नहीं है इसलिए वायदा करते हैं। अब यह मजेदार बात है कि जब भरोसा नहीं है तो कोई वायदा निभाएगा भी इसका क्या प्रमाण है? 🤣 आप किसी के पीठ पीछे क्या करते हो जब तक अगले को पता नहीं चलता तब तक वायदा निभाया जा रहा है। पता चलते ही टूट जाएगा। अतः वायदा करना ही risk का काम है, उसी का करें जो आप वाकई कर सकते हैं। किसी का इस्तेमाल करने के लिए उससे वायदा करना, उसे धोखा देना है। समय आने पर हो सकता है, कि प्रमाण होने पर आप पर कानूनी कार्यवाही भी हो जाये। यदि आप खुद पर नियंत्रण नहीं रख सकते और एक से अधिक के साथ सेक्स करने के लिए मजबूर हैं तो कृपया किसी से मोनोगेमस होने का वायदा न करें। जैसे मैंने नहीं किया। ये और बात है कि मुझे दू...

Who is the good human? ~ Shubhanshu

अच्छा इंसान वो नहीं है जो खुद का नुकसान करके, सबकी मदद करता है। अपना ध्यान नहीं रखता। अपना जीवन छोटा कर लेता है। अच्छा इंसान वो भी नहीं है जो किसी की मदद कर सकता है लेकिन क्या मिलेगा बदले में? यह सोचता है। वो भी अच्छा इंसान नहीं है जो स्वर्ग-नरक, ईश्वर के डर या लालच में दूसरों का लाभ करता है। क्योंकि यह सिर्फ स्वार्थ है और इसमें कोई अगले व्यक्ति से वास्तविक लगाव नहीं है। अच्छा इंसान वो भी नहीं है जो अच्छाई का दिखावा करता है। वीडियो, फ़ोटो डालता है, शोर मचा कर सबको दिखाता है कि वह भलाई कर रहा है। उसे सिर्फ अपने काले कारनामे छुपाने हैं और अपनी गलतियों को दबा कर पश्चाताप कर रहा ऐसा दिखा कर सहानुभूति लेनी है। या पब्लिसिटी चाहिए, कुछ नेता जैसा या सेलिब्रिटी बनने की धुन सवार है। जैसे सोनू सूद। अच्छा इंसान होना वाकई दुर्लभ है और ऐसा इसलिए है क्योंकि निस्वार्थ भाव से दया, करुणा और सबक देने की क्षमता सबमें नहीं होती। हर किसी की मदद करना भी उचित नहीं है। मदद उसकी ही करनी चाहिए जो उसकी अंतिम मदद बने। जैसे कोई भूखा है तो वह आखिर क्यों भूखा है? अब तक कैसे जीवन जिया? अब क्या समस्या हो गयी? जैसे सवाल ...

Love and Friendship is bigger than being right on every place

कुछ लोग कहते हैं कि आप पर तर्क नहीं है मेरी बात का इस लिए कह रहे कि हम अपना कर रहे, आप अपना करो। जबकि हकीकत यह है कि जब मेरी ईगो सक्रिय होती है तो आजतक कभी भी मैं तर्क नहीं हारा हूँ लेकिन फिर उस व्यक्ति को इतना ज़लील होना पड़ा कि फिर दोस्ती भी न रही। तो मैं दोस्ती बनाये रखना चाहता हूँ, चाहे आप गलत ही क्यों न हो। जहाँ पर आप सही हो, उतनी ही दोस्ती रखता हूँ। सब मेरे जैसा तुरन्त कठोर निर्णय लेने वाले और आदर्शवादी नहीं हो सकते। इसलिए उनको अपने जैसा बनाने की कोई ज़िद नहीं करता। मुझे बचपन से ही कोई विशेष व्यक्ति कहा जाता रहा है। एलियन, दूसरे ग्रह का प्राणी, अजीबोगरीब, संत, अवतार, देवता, देवी का भेजा बालक आदि। आध्यात्मिक लोग तो जैसे ही थोड़ा जान लेते हैं मेरी जीवन शैली, तुरन्त अपने गुरुओं से मिलवाने की कोशिश करने लगते हैं। किसी बड़े व्यापारी के साथ बैठ जाऊँ तो थोड़ी ही देर में वह बड़ी ही इज़्ज़त से पेश आने लगता है। क्योंकि मैं उसके व्यापार को बढाने के लिये टिप्स दे देता हूँ। ऐसे ही जहाँ भी जाता हूँ उच्च पदों पर मौजूद लोगों का दोस्त बन जाता हूँ। कारण वही है कि मेरे जैसा आदर्शवादी और फायदेमंद इंसान उन्हो...

Furrr 🤣

विद्वान: बहुत ऐंठ में रहता है। शुभ: सारी जिंदगी पिजंडे से जूझ कर, पिजंडे की दीवारों में उड़ने की कोशिश में घायल कर चुके पंखों वाले छोटे से पक्षी को जब आज़ादी मिलती है न, तो वो सबसे पहले जाकर बाज़ को मार देता है क्योंकि वही कई बार उसे पिजंडे में चोंच डाल कर उसे डराता था। जानते हो वो 2 कौड़ी का पक्षी, पक्षियों के शिकारी को भी पहली ही बार में कैसे मार देता है? विद्वान: क...कैसे? शुभ: जब वह 2 कौड़ी का पक्षी पिजंडे में था न, तभी तक 2 कौड़ी का था। वह जब व्यस्त नहीं था तो उसने योजना बनाई। उसने हर वो रास्ता निकाला कि कैसे वो पिजंडे से आज़ाद होगा और कैसे वो अपनी आज़ादी को कायम रखेगा। उसकी आज़ादी में बाधा थे ये 4 बिंदु: 1. उसकी कायरता 2. उसकी मूर्खता 3. पिंजरा 4. शिकारी पक्षी जैसे-जैसे उसने इन 3 बाधाओं को पार कर लिया, तो वह इतना खूंखार हो चुका था और आत्मविश्वास से भर चुका था कि उसे शिकारी पक्षी से डर लगना ही बन्द हो गया। वो अंधेरी रातों को सबसे ऊंचे पेड़ों पर जाकर छुपा। उसने उस ऊंचाई को पाया, जहाँ से उसे बाज की पीठ दिखने लगी। बाज की सिर्फ आंखें ही असली ताकत हैं। और वह ऊपर नहीं देख सकतीं। वह उसकी पीठ पर बै...

The future of earth is on your hands...

हर अच्छी विचारधारा का भविष्य देख कर उसे अपना लेना एक जबरदस्त फायदा देता है। सभी लोग जो आपसे जुड़े हैं, वो भले ही आपकी सभी विचारधाराओं से सहमत न हों, क्योंकि वे उस दौर में थे ही नहीं, जब हमने इन्हें समझाया था, फिर भी वे जिन भी विचारधारा के शिक्षण के समय उपलब्ध रहे, अपनी नई क्रांतिकारी विचारधारा के उपहार के स्नेह में आपको छोड़ नहीं पाएंगे। इसे कहते हैं, वफादारी। जो विरुद्ध विचारों की तुलना में समान विचारों को अधिक महत्व देती है। इसीलिए शायद कोई भी एकदम मेरे समान नहीं भी सोचता हो लेकिन वह मेरे कुछ विचारों से अवश्य ही लाभ उठाएगा और उसे सराहेगा। यह लाभ उसे जोड़ता है। जिस समय लोगों के अपने लोगों ने, उनको अकेला छोड़ दिया, मैंने उनको इतनी दूर से सम्भालने में सफलता पाई। ये बहुत अच्छा मौका था जो मुझे कुछ अच्छा करने दे रहा था। मैं अक्सर सोचता था कि एक कमरे में दुनिया भर का ज्ञान समेटने के अलावा मैं और क्या कर सकता हूँ जो लोगों को भी मेरी तरह आनन्दमय जीवन दे सके। मैंने अंततः रास्ता खोज ही निकाला। एक मोबाइल, इंटरनेट, लैपटॉप, बड़ा LED मॉनिटर और मेरी उंगलियों ने दुनिया में छिपे अच्छे और भटके हुए लोगों को ...

हर सेक्स में सक्रिय व्यक्ति को यह जानना चाहिए। ~ Shubhanshu

एक बहुत ज़रूरी बात सबको जान लेनी चाहिए जो मैंने 13 साल में अपनी open रिलेशनशिप पार्टनर के साथ सेक्स लाइफ में सीखी है। वह बात यह है कि कभी भी वीर्य को योनि में न छोड़ें। यहाँ तक कि कंडोम में भी, मैं वीर्य अंदर नहीं निकालता। क्या पता कंडोम में छेद हो गया हो छोटा सा? मैं नहीं चाहता कि उसे मेरी वजह से कोई गर्भनिरोधक गोली लेनी पड़े या गर्भपात करवाना पड़े। अपनी पार्टनर को अपनी तरह समझिए। वो भी सिर्फ मजे लेने के लिए आपके साथ है। परेशानी मोल लेने के लिए नहीं। बिना कंडोम के मैं केवल विश्वास पात्र फीमेल पार्ट्नर से ही यौन सम्भोग करता हूँ जिसे STD की पूरी जानकारी है। उसे पता है कि किसी नादान-मूर्ख से असुरक्षित संभोग करने से उसे न सिर्फ STD हो सकती है बल्कि उससे मुझे भी बीमारी लग सकती है। प्यार करने वाले एक दूसरे की परवाह करते हैं। और मूर्ख, ज़रा सी सावधानी न रख कर अपनी ही साथी की मार लेते हैं। 13 वर्षों में आज तक इस तरह से उसे गर्भ नहीं ठहरा। लेकिन इसके लिए अभ्यास की आवश्यकता होगी आम लोगों को। अभ्यास के लिए कंडोम लगा कर चरम से कुछ पहले ही बाहर निकाल कर हाथ से सहलाते हुए वीर्यपात कीजिये कंडोम में ही। ज...

महिलाओं को ये जानकारी होनी ही चाहिए ~ Shubhanshu

लड़कियों को जो गलत जानकारी समाज देता है उनमें से कुछ का निवारण: 1. वैज्ञानिकों ने वर्षों के अध्ययन से पाया है कि bra आपके स्तनों को भले ही झटकों से आराम देती है लेकिन आपके स्तनों को बेडौल, ढीला बना देती है और निप्पल नीचे की तरफ लटका देती है।  अधिकतर bra सही साइज़ की नहीं मिलती हैं या महिलाओं को लेना नहीं आता है और अधिकतर ब्रा का मेटेरियल स्तनों को तकलीफ और कैंसर कर देता है। सूती स्पोर्ट्स ब्रा बेहतर विकल्प रहता है। लेकिन उसका इस्तेमाल केवल भागदौड़ के समय ही करना चाहिए। स्तनों को बांधने का कोई भी अप्राकृतिक तरीका स्तनों को लटका ही देगा। बेहतर होगा कि बहुत ज़रूरी होने पर ही इसका इस्तेमाल करें। निप्पल छुपाने के लिए नहीं। निप्पल है तो उभार दिखेगा ही। सन्दर्भ: 1.  Times of India 2.  Lifehack सस्ती स्पोर्ट्स ब्रा यहाँ से लें। 2. सैनेटरी पैड, कपड़ा और टैम्पॉन से लाख गुना बेहतर मेंस्ट्रुअल कप है जो 5 से 10 साल तक चलता है और बहुत सस्ता मिल जाता है। शुभ (Shubhanshu) जाने तन-मन-धन की बात! 😎 दोनो जानकारी नेट पर सर्च करके पा सकते हैं। 2020©

सभी धर्मों को आईना दिखा देना चाहिए।

आज अचानक विचार आया कि बहुत से लोगों को अचानक किसी ऐसे कार्य को करना चाहिए जिसे करने से किसी का कोई नुकसान न होता हो लेकिन धार्मिक आपको मारने के लिए कत्लेआम मचा दें। जैसे फ्रांस में पैगम्बर के कार्टून को लेकर हो रहा है। इसी तरह बाकी धर्मों के अंदर भी चुतियापन्ति पर आधारित बातें खोजिये और उनको कर डालिये। याद रखिये, धर्मग्रंथ जलाना, उसे गंदा करना, बिना प्रमाण के अपमान जनक टिप्पणी करना, गाली द्वारा या थूक, जूते, गन्दगी, मल-मूत्र आदि के ज़रिए अपमान करना इस में शामिल नहीं है। ये सब कानूनन अपराध और अनैतिक कार्य हैं। इससे होगा यह कि सभी धार्मिकों की धर्मांधता सामने आएगी और तब उसके भयंकर परिणाम देख कर, ये सब खुद ही अपना धर्म छोड़ कर धर्ममुक्त बन जाएंगे। धर्ममुक्त सत्यमेव जयते! 😊 ~ Shubhanshu 2020© नोट: निजी विचार हैं। कोई मेरे विचार मानता है तो यह उसका खुद का फैसला है।

मूर्ख होते हैं धार्मिक ~ रिसर्च

मुझसे लड़ कर गए धार्मिकों से जो ज्ञान मिला है, उसके अनुसार, धर्म का वजूद सिर्फ इसलिए है क्योंकि, नर मानव खुद को जानवरों, महिलाओं और अपने से निम्न स्तर के लोगों को तुच्छ और नफरत के लायक समझता है। वो भी केवल इसलिए क्योंकि जानवर मन्दिर-मस्जिद-चर्च-मठ-गुरुद्वारा आदि बना कर मूर्खतापन्ति नहीं करते। महिला को पहले घर में बंद रखा जाता था इसलिए वह पूजा नहीं कर पाती थी मंदिर में और आज भी कई मंदिरों/धर्मस्थलों में महिला का प्रवेश वर्जित (केरल) है। इसी तरह शूद्रों को भी पूजा नहीं करने दी जाती है। अतः ये इनको जानवरो की तरह समझते हैं और उनके साथ जुल्म करते हैं। जिस दिन ये धार्मिक और आस्तिक मूर्खतापन्ति खत्म हो जाएगी कि जानवर और इंसान में कोई फर्क है, उस दिन ये सब जुल्म और अन्याय खत्म हो जाएंगे। मुझे आश्चर्य होता है कि जुल्म और अन्याय करने वाला धार्मिक पुरुष समुदाय व इन पुरुषों पर आश्रित महिलाएँ काल्पनिक और पाखंड युक्त निरर्थक कर्म करके खुद को श्रेष्ठतम समझते हैं? इसी मूर्खता से पता चलता है कि धार्मिक मूर्ख होता है। रिसर्च भी यही साबित करती है कि धार्मिक लोगों का IQ (बुद्धिलब्धि) नास्तिक और वीगन लोगों ...

सूजी व पीनट बटर का वेनिला स्वाद में हलवा

थोड़ी सूजी भून लें सुनहरी होने तक। साथ ही दूसरे बर्तन में 3-4 चम्मच वीगन शक्कर मिला कर पानी उबाल लें। अब आवश्यकता अनुसार मीठा पानी धीरे-धीरे सूजी में डालें और चलाते रहें। पहले पानी देखने में ज्यादा लगता है फिर सूजी फूलने लगेगी और गाढ़ी होने लगेगी। इसी समय 1 चम्मच पीनट बटर इसमें मिला दीजिये। अब काजू लेकर उसे तोड़ लें और मिला दें साथ में ही। जब पर्याप्त गाढ़ा हो जाये तो गैस बंद कर दें और 2-3 बून्द वेनिला एसेंस डाल कर मिला लें। अब तैयार मिश्रण को गहरी कटोरी में जैतून का तेल लगा कर या ऐसे ही ठूंस कर एक समान भर दें और ऊपर से पिसी हरी इलायची डाल दें। अब इसको ठंडा होने दें। ठंडा होने पर कटोरी को पलट कर हलवा केक बाहर निकाल लें। इस को चम्मच से काट-काट के खाइए अन्यथा उंगली चबा जाएंगे। ~ Shubhanshu the Experimental चूतिया Shef 2020©

कमोड में गिरा चाभी का गुच्छा

खूब सारा पीला हग कर जैसे ही उठा, अंटी में फंसा चाभी का गुस्सा कमोड में गिर गया। दिख ही नहीं रहा था कि कहाँ है तो बार बार फ्लश करने का मन हो रहा था। लेकिन फिर क्या होता, सबको पता है। अब गलती हो गई तो हो गई। जुगाड़ लगा कर बिना हाथ डाले मैग्नेट से उठाया तो मैगनेट में दम ही नहीं था। बार बार छोड़ दे रहा। किसी तरह नजाकत से उठा कर निकाला तो देखा कि लोहे का गुच्छा सोने का बन गया था। धोते ही वापस लोहा हो गया। आप बिन धुले बेच देना। 😆 ~ Shubhanshu 2020©

टट्टी सपना: हो गया सारा मूड खराब।

आज सपने में मैं, न जाने कहाँ? एक नई जगह पर आया हुआ था। तभी मुझे टट्टी लगी। मुझे लगा जैसे कि सामने वाले घर में लैट्रिन है। तो अंदर गया। देखा कि दाई तरफ 2 दरवाजे थे। 1 लेट्रिन का और दूसरा दुल्हन जैसा सज़ा हुआ। बाहर एक ग्रामीण जैसा दिखने वाला अधेड़ आदमी बैठा था। जैसे ही मैं गेट खोल के अंदर पहुँचा, वह उठ कर अंदर जाने लगा और मुझे बुलाने लगा। मैं डर गया और सोचा कि ज़रूर ये वैश्यावृत्ति का अड्डा है। आभास होते ही मैंने आवाज लगाई, चचा मुझे लेट्रिन जाना है। ये सुनते ही चचा के चेहरे पर मायूसी छा गई। मैंने सोचा कि कहीं हगने के भी पैसे न देने पड़ जाएं। लेकिन सोच लिया कि दे दूंगा। और घुस गया लेट्रिन में। फिर याद नहीं कि क्या हुआ? शायद नींद खुली थी डर के मारे कि कहीं बिस्तर पर तो न हग दिया? चलो बिस्तर तो साफ था। फिर सो गया। फिर सपना शुरू हुआ। अबकी बार 2 लड़के घर आये हुए थे। एक दिखने में नाजुक सा लग रहा था और एक हट्टाकट्टा। रात का समय था। कूलर चल रहा था। अचानक देखा कि दोनों एक दूसरे से लिपटे हैं और चुम्बन ले रहे। मैं समझ गया कि होमोसेक्सुअल हैं ये दोनों। जैसे ही पीछे वाले ने आगे वाले की पैंट की बेल्ट खोली ...